Saturday, 16 May 2015

(हिंदी कविता) - टकला

टकला


रमेश भाई को जब तक हुए बाल बच्चे,
उन्के सर के एक भी बाल नही बचे,
कुछ बच्चे उन्हे टकला टकला कह कर चिढाते,
तो कुछ सर पे मार के भाग जाते ।

सारे मुहल्ले मे किस्सा मश्हुर था,
कि इन्के बाल यो ही नही उङॆ बल्की ऊङाए गये है,
बेचारे पत्नी द्वारा बहुत सताए गये है,
घर मे बीबी की डाट पडती,
दफ़्तर मे बॉस देता धमकी,
तुमसे मेरी बर्षॊ पुरानी यारी है,
वर्ना काम मांगाने वालो मे आधी लड़किय़ाँ कुवाँरी है ।

जब दाढी बनवाने सैलून जाते ,नाई भी ईन पर चिल्लाते,
ससुरजी भी कहते कि अगर तू शादी के पहले टकला हो जाता,
तो हमारे दहेज़ का खर्चा बच जाता,
जब वो बच्चो को स्कुल छोड़ने जाते ,
बच्चे ईन्हे अपना नौकर बताते,
भाई आज के फैशन और खुबसुरती के ज़माने मे गंजा होना श्राप है,
अब बच्चे कैसे बताँए कि टकला उन्का बाप है ।

एक सामाजिक संस्था तो यँहा तक कहती है,
हर टकले को शादी करने से रोका जाए ,
कहीं ऐसा ना हो यह बिमारी पीढी दर पीढी फैलते फैलते,
सारा संसार टकला हो जाये ।

ऊधर एक फिलोसोफर का कहना है ,
जिन्की सोंच गिरी हुई होती है उन्के बाल जल्दी गिर जाते है,
ऐसे पतीतो को गोली मार देनी चाहिये ,
मुझे आशचर्य है वे खुद शर्म से क्यों नही मर जाते है ।

एक बडा खुशनसीब नौजवान था मतवाला ,
सर पे थे सुन्दर बाल , साथ में सुन्दर बाला,
देख कर जोड़ी रमेश भाई ऐसे खो गये,
जैसे चलते चलते हीं सो गये,
जब बाला के बालों ने गुदगुदी मचाया,
खुद को लड़की से लिपटे पाया,
नौजवान बोला-अबे टकला हो कर लाईन मारता है,
क्यों टकला होना क्या अपराध है,
लगता है आज हीं गंजे तेरा होने वाला श्राध है ।

ईस पर रमेश भाई के खून में भी गर्मी आई,
बोले-अबे ओ खरबुजे,चुहिया के साथ नाच रहे चूजे,
भगवान करे तूझे कैंसर हो,तूझे कोढ हो जाये,
तेरे घर में आग लगे ,तूझ पर आतंकवादी का हमला हो जाए,
तू तबेले में जाकर मरे,
बच्चे तेरे सर पे तबला बजाएँ ,
जा मैं तुझे श्राप देता हूँ,
जल्द हीं तू भी मेरी तरह टकला हो जाए !!!!

वो कभी मिल जाएँ तो - Wo Kabhi Mil Jaaein To (Ghulam Ali)

वो कभी मिल जाएँ तो - Wo Kabhi Mil Jaaein To (Ghulam Ali)

Lyrics By:  अख्तर शीरानी      
Performed By: गुलाम अली  


वो कभी मिल जाएँ तो क्या कीजिए 
रात दिन सूरत को देखा कीजिए 


चाँदनी रातों में इक-इक फूल को 
बे-खुदी कहती है सजदा कीजिए 
वो कभी मिल जाएँ  ……

जो तमन्ना बर न आए उम्र भर
उम्र भर उस की तमन्ना कीजिए 
वो कभी मिल जाएँ  ……

इश्क की रंगीनियों में डूब कर 

चाँदनी रातों में रोया कीजिए 
वो कभी मिल जाएँ  ……


पूछ बैठे है हमारा हाल वो 
बे-खुदी तू ही बता क्या कीजिए 
वो कभी मिल जाएँ  ……

हम ही उस के इश्क के काबिल न थे 

क्यूँ किसी जालिम का शिकवा कीजिए 
वो कभी मिल जाएँ  ……

आगे (गाने में नहीं है):

आप ही ने दर्द-ए-दिल बख्शा हमें 
आप ही इस का मुदावा कीजिए 
वो कभी मिल जाएँ  ……

कहते है 'अख़्तर' वो सुन कर मेरे शेर 

इस तरह हमको न रुसवा कीजिए 
वो कभी मिल जाएँ  ……

Thursday, 14 May 2015

Certificate_2590_Half_Marathon of Shri Ashok Kumar


Name                      : Ashok Kumar
Chest No                : 826
Run's Year             : CRPF Half Marathon 2014
Completion Time  : 2:35:08

Certificate_2590_Half_Marathon 

Wednesday, 13 May 2015

समा है सुहाना सुहाना - Sama Hai Suhana Suhana (Kishore Kumar, Ghar Ghar ki Kahani)

समा है सुहाना सुहाना - Sama Hai Suhana Suhana (Kishore Kumar, Ghar Ghar ki Kahani)

Movie/Album: घर घर की कहानी (1970)
Music By:  कल्याणजी आनंदजी   
Lyrics By:  हसरत जयपुरी     
Performed By: किशोरी कुमार 


समा है सुहाना सुहाना, नशे में जहाँ है   
किसी को किसी की खबर ही कहाँ है 
हर दिल में देखो, मोहब्बत जवा है 

कह रही है नजर, नजर से अफसाने 
हो रहा है असर के जिसको दिल जाने 
देखो ये दिल की अजब दास्ताँ है 
नजर बोलती है, दिल बेजुबां है 
समां है सुहाना सुहाना ……

हो गया है मिलन, दिलो का मस्ताना 
हो गया है कोई किसी का दीवाना 
जहाँ दिलरुबा है, दिल भी वहां है 
जिसे प्यार कहिये , वही दरमियाँ है 
समां है सुहाना सुहाना ……

Saturday, 9 May 2015

हम लाए हैं तूफान से - Hum Laaye Hain Toofan Se (Md. Rafi, Jagriti)

हम लाए हैं तूफान से - Hum Laaye Hain Toofan Se (Md. Rafi, Jagriti)

Movie/Album: जागृति (1954)
Music By:  हेमंत कुमार  
Lyrics By:  प्रदीप    
Performed By: मो. रफी


पासे सभी उलट गए दुसमन की चाल के  
अक्षर सभी पलट गए भारत के भाल के 
मंजिल पे आया मुल्क हर बला को टाल के 
सदियों के बाद फिर उड़े बादल गुलाल के 

हम लाये हैं तूफान से कश्ती निकाल के 

इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के 
तुम ही भविष्य हो मेरे भारत विशाल के 
इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के 

देखो कहीं बरबाद ना होए ये बगीचा 
इसको ह्दय के खून से बापू ने है सींचा 
रक्खा है ये चिराग शहीदों ने बाल के 
इस देश को ……  


दुनिया के दांव पेंच से रखना न वास्ता 
मंजिल तुम्हारी दूर है, लम्बा है रास्ता 
भटका ना दे कोई तुम्हें धोखे में डाल के 
इस देश को …… 

ऐटम बमों के जोर पे ऐंठी है ये दुनिया 
बारूद के इक ढेर पे बैठी है ये दुनिया 
तुम हर कदम उठाना जरा देख भाल के 
इस देश को …… 

आराम की तुम भूल भुलइया में ना भूलो 

सपनों के हिंडोलों पे मगन हो के ना झूलो 
अब वक़्त आ गया मेरे हँसते हुए फूलो 
उठो छलाँग मार के आकाश को छू लो  
तुम गाड़ दो गगन पे तिंरगा उछाल के 
इस देश को …… 





Monday, 4 May 2015

चुन चुन करती आई चिड़िया - Chun Chun Karti Aayi chidiya (Md. Rafi, Ab Dilli Door Nahin)

चुन चुन करती आई चिड़िया - Chun Chun Karti Aayi chidiya (Md. Rafi, Ab Dilli Door Nahin)

Movie/Album: अब दिल्ली दूर नहीं (1957)
Music By:  दत्ताराम 
Lyrics By:  शैलेन्द्र   
Performed By: मो. रफी  


चुन चुन करती आई चिड़िया
दाल का दाना लाई चिड़िया 
मोर भी आया, कौवा भी आया 
चूहा भी आया, बन्दर भी आया 
चुन चुन करती...

भूख लगे तो चिड़िया रानी 

मूंग की दाल पकाएगी 
कौवा रोटी लाएगा 
लाके उसे खिलायेगा 
मोर भी आया ...

चलते चलते मिलेगा भालू 

हम बोलेंगे नाचो कालू 
मुन्ना ढोल बजाएगा 
भालू नाच दिखाएगा 
मोर भी आया ...

साथ हमारे चले बाराती 

मैं तो हूँ मुन्ने का हाथी 
सीधे दिल्ली जाऊँगा 
तेरी दुल्हनिया लाऊँगा 
मोर भी आया ...